नीम और गाय स्वस्थ्य के लिए अमृत सम |
– आचार्य श्री विद्यासागर जी (10/12/2017) रविवार

चंद्रगिरि डोंगरगढ़ में विराजमान संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की नीम का वृक्ष बहुत उपयोगी होता है उसकी छाल से बनी जडीबुटी से बड़े से बड़े रोगों, विभिन्न बिमारियों का उपचार संभव है | वृक्ष oxygen छोड़ते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं जिससे हमें प्राण वायु प्राप्त होती है | नीम का फल कडुवा होता है परन्तु उसका स्वास्थ्य के लिए लाभ बहुत है | नीम की शाखायें एवं टहनी का उपयोग दातून आदि के लिए भी उपयोग किया जाता है | इस प्रकार नीम का वृक्ष मनुष्य एवं प्रकृति के लिए बहुत लाभकारी है जिसे पहले के लोग अपने आँगन में लगाते थे और स्वस्थ्य रहते थे आज आप लोग इस ओर ध्यान नहीं देते हैं और कई छोटी – बड़ी बिमारियों से ग्रषित हो जाते हैं |
गाये जो बहुत भोली – भाली मुख वाली जिसे हम गईया भी कहते हैं वह हमारे लिए अत्यंक दुर्लभ है क्योंकि वह हमेशा 24 घंटे प्राण वायु oxygen ग्रहण करती व छोड़ती है | उसके सिंह की कीमत सोने से भी ज्यादा है यदि आज सोना तीस हज़ार रुपये है तो उसकी किमान एक लाख से भी अधिक है | गाये के दूध में स्वर्ण होता है उसका सेवन अमृत सम होता है | घर में गाये होने से घर का पूरा वातावरण पवित्र हो जाता है | गाये द्वारा ऐसी क्या राशायनिक क्रिया की जाती है जिससे वह प्राण वायु oxygen ग्रहण करती व छोड़ती है यह विचारणीय है |